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आर्यवीर दल उत्तरप्रदेश
शिविर PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Saturday, 10 November 2012 00:34

वर्ष में कम से कम दो शिविर या अधिक के माध्यम से युवक – युवतियों का शारीरिक, सामाजिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास करना । यह शिविर प्रणाली चार स्तर की होगी ।

 

प्रथम वर्ष – आर्य वीर वर्ष

द्वितीय वर्ष – शाखा नायक

तृतीय वर्ष – उप व्यायाम शिक्षक

चतुर्थ वर्ष - व्यायाम शिक्षक

 
प्रशिक्षण PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Saturday, 10 November 2012 00:07

१ -  सर्वांग सुन्दर अभ्यास

२ - योगासन

३ - प्राणायाम

४ - दण्ड बैठक

५ - खेल लाठी ,भाला

६ - तलवार

७ - कराटे (नियुद्धम )

८ - आत्म सुरक्षा

९ - सैनिक अभ्यास व शिक्षा

१० - फायरिंग

११ - तीरन्दाजी ।

Last Updated on Saturday, 10 November 2012 00:31
 
हमारे प्रतीक PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Friday, 09 November 2012 23:58

- चिह्न

• केंद्र में सूर्य, ओ३म् लिखा हुआ.

• सूर्य के नीचे एक दूसरे को काटती हुई दो तलवारें

• तलवारों के नीचे एक आदर्श वाक्य ‘’ अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्तु ‘’ अंकित होगा ।

 

 

 

2 - ध्वज

ध्वज रंग - केसरी

• वस्त्र – शुद्ध स्वदेशी

• (अनुपात लम्बाईxचौडाई) 3:2

• ध्रुव - रंग सफेद

• लेखन - रजत या सफेद रंग

 

 

 

३ - गणवेश
आर्य वीर
• केसरी आर्य वीर दल टोपी
• सफेद शर्ट
• काली बेल्ट
• खाकी निकर
• सफेद मोजे
• सफेद पीटी जूता
• लाठी
• सफेद बनियान

आर्य वीरांगना
• केसरी टोपी

• सफेद सूट (कुर्ता)

• सफेद सलवार

• केसरी दुपट्टा
• सफेद मोजे
• सफेद पीटी जूता
• लाठी

 
पाठ्यक्रम PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Saturday, 10 November 2012 00:03

चारित्रिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित पाठ्यक्रम रहेगा

१- ब्रह्मचर्य जीवन शैली के आधार पर नियमित दैनिक दिनचर्या

२- माता – पिता व गुरु आदि की सेवा व आज्ञा पालन ।

३- अभिवादन

४- खान – पान

५ – स्वच्छता

६ – अनुशासन

७- देश भक्ति

८- आर्य समाज

९- पांच महायज्ञ का अनुष्ठान

१०- प्राथमिक चिकित्सा

 
उद्देश्य PDF Print E-mail
Written by Administrator   
Friday, 09 November 2012 23:51

उद्देश्य

 


१- वैदिक धर्म , आर्य संस्कृति एवं आर्य सभ्यता की रक्षा , प्रचार और प्रसार करना।
२- बालक –बालिकाओं को शिविरों के माध्यम से ब्रह्मचर्य ,शारीरिक और बौद्धिक रूप से
विकसित करना ।
३ - योग के माध्यम से शरीर व मन स्वस्थ बनाना।
४ - किसी भी क्षेत्र में भूचाल , बाढ या कोई प्राकृतिक विपदा आने पर तन –मन – धन से
पीडितों को सेवा भाव से सुख पहुंचाना ।
५ - भारत के संविधान के अनुरूप कानून व्यवस्था का पालन करना और अपने कर्तव्यों व
अधिकारों के प्रति सजग बनाना ।
६ - महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज के नियमों , उपनियमों आदि का
यथायोग्य पालन करना और कराना ।
७ - यज्ञ का प्रचार – प्रसार एवं पेड पोधे लगवाकर कर जल वायु में फैले प्रदूषण को समाप्त करना।
८ - महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश के छठे समुल्लास पर
आधारित राज्य व्यवस्था को लागू कराना ।
९- देश में व्याप्त अज्ञान, अन्याय और अभाव को मिटाने का प्रयास करना ।

Last Updated on Saturday, 10 November 2012 00:32
 
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